आज सुबह सब्जीमंडी गया आलू , टमाटर के दाम पूछता आगे बढ़ रहा था की तभी पीछे से एक आवाज़ आई 'बाबूजी आइये यहाँ से ले लीजिये सब्जी ताजी है मंडी में ऐसी सब्जी नही मिलेगी' मैं मुडा और उसके पास पहुँचा सब्जी का मोल तोल होने लगा तो उसने पूछा 'बिहार के हैं का' , मैंने कहा ये क्यों पूछ रहे हो मोल भाव कर रहा हूँ इसलिए क्या वो बोला 'नही बाबूजी अगर बिहार के हैं तो मोल भाव की क्या बात है जो कह रहे हैं वही दे दीजियेगा!
खैर मैंने सब्जी ली और आगे बढ़ गया लेकिन घर लौटने के बाद मैं सोचने लगा की बिहार और बिहारी लोगों के बारे में सोचने लगा! फिर अचानक मुझे मुंबई में बिहारी लोगों पर हुए जुल्म याद आने लगे, यहाँ आगे बढ़ने से पहले मैं बता दूँ की मैं बिहार का रहने वाला नही लेकिन मेरी पढ़ाई लिखी बिहार में हुई है अब फिर मुद्दे पर आते हैं जरा सोचिये आप सुबह अखबार लेते है , वो अखबार ९० फीसदी घरों में कोई बिहारी हाव्कर ही पहुंचता है, आप सुबह दूध लेते हैं , ८० फीसदी घरों में दूध कोई बिहारी ही पहुंचता है , सब्जीमंडी से लेकर सहर में दौड़ते ऑटो रिक्शा या सड़कों पर रेंगते रिक्शा , रेलवे स्टेशनों पर कूली या स्टेशनों खाने का सामान बेचने वाले लोग, दिल्ली , मुंबई जैसे बड़े सहरों में चमचमाती हुई बिल्डिंग बनने वाले कारीगर से लेकर लेबर तक और बिल्डिंग बनने के बाद उसको साफ़ करने वाले स्वीपर और उस बिल्डिंग की सुरक्षा करने वाले गार्ड तक लगभग ८० फीसदी बिहारी ही है ये तो रही समाज के
शनिवार, 11 जुलाई 2009
शनिवार, 28 मार्च 2009
वरुण गाँधी से क्यों जल रही है कांग्रेस
पिछले १० दिनों से जिस तरह वरुण गाँधी मीडिया की सुर्खियों में आयें हैं इसे देखकर मैं यकीन के साथ कह सकता हूँ कि कांग्रेस काफी तकलीफ में होगी क्यों कि कांग्रेस ने ये नही सोचा था कि मामला यहाँ तक पहुँच जाएगा कांग्रेस ने जब इस खेल कि शुरुआत कि तो उसे उम्मीद थी कि जैसे ही मामला भड़केगा और चुनाव आयोग में जाएगा तो बीजेपी जो आज अपने को सेकुलर बनने कि कोशिश कर रही है मुस्लिम वोटों के काटने कि डर से वरुण पर लगाम लगायेगी और हो सकता है कि वरुण का टिकेट ही काट दे ऐसा नही हुआ और मामला कांग्रेस के उलट और वरुण के पक्ष में होता जा रहा है आप ये मत samajhiyega कि मैं कांग्रेस virodhi और बीजेपी samarthak हूँ वरुण गाँधी कि एक बात को लेकर कांग्रेस ने तिल का taad bana दिया बिना ये jane कि cd सही है या ग़लत कम से कम rahul और priyanka ने जिस tarak कि bayanbazi कि है
बुधवार, 25 मार्च 2009
अमेरिका से लेकर भारत तक सामाजिक दिवालियापन
कभी कभी कुछ खबरें ऐसी होती हैं जो सोचने पर मजबूर कर देती हैं, और ये ख़बर भी कुछ ऐसी ही है आज अख़बारों में पढ़ा की रोमानिया की एक लड़की पढ़ाई के लिए अपना कौमार्य बेचना चाहती है और इसके लिए उसने बकायदे इन्टरनेट पर बोली लगाई है हलाकि ये पहला मामला नहीं है जब किसी लड़की ने इन्टरनेट पर इस तरह की बोली लगाई है, लेकिन इसबार मैंने लिखने का फ़ैसला किया रोमानिया की एलिना पर्सिया नाम की इस १८ वर्षीय छात्रा ने अपनी पढ़ाई पूरी करने के लिए अपने कुंवारेपन की बोली लगाई है पर्सिया को उम्मीद है की उसे इस नीलामी से ५०००० uro की कमाई होगी अबतक काफी लोगों ने इस नीलामी में दिलचस्पी दिखाई है इससे पहले अमेरिकन छात्रा नताली डायलन ने भी अपने कुंवारेपन की बोली लगाई थी नताली ने अपने पछ में ये दलील दी की मुझे अपनी पढ़ाई जारी रखने की लिए पैसे की जरूरत है इसलिए मैं ये काम कर रही हूँ , नताली ने ये भी कहा की मेरी बहन ने भी पढ़ाई करने की लिए कैलिफोर्निया की सड़कों पर कई दिनों तक वैश्यावृति की उसने ऐसी और बहुत सी लड़कियों का उदहारण दिया जो पढ़ाई के लिए ऐसे काम करती हैं , खैर फिर वापस आते हैं मुद्दे पर नताली ने जब अपनी बोली लगाई तो कई अरबपतियों की तिजोरी के ताले खुल गए कई अरबपतियों ने तो नताली को कई करोड़ रुपये की पेशकश की एक सज्जन ने हद ही कर दी उन्होंने कहा की यदि नताली उनके साथ रात बिताती है तो वो नताली को जिंदा शेर देंगे लेकिन अफ़सोस की कोई भी अमीर दिलवाला ऐसा नहीं मिला जिसने नताली से ये कहा हो की तुम पढो मैं तुम्हारी पढ़ाई का खर्च उठता हूँ , पढ़ाई के लिए तुम्हे ये सब करने की जरूरत नहीं नताली और पर्सिया हमारे समाज के विकास के मॉडल को बयां करती हैं तो उनपर बोली लगाने वाले सज्जन हमारे समाज की मरी हुई मानवता को बयां करते हैं
मंगलवार, 30 सितंबर 2008
मन्दिर, मन्नत और मौत
सैर के वास्ते सड़कों पे निकल आते थे, अब तो आकाश से भी पथराओ का डर होता है
पिछले कुछ महीनो से जिस तरह मंदिरों में हादसे हो रहे है उसे देख कर और सुन कर दिल काँप उठता है!
पहले हिमाचल प्रदेश के नैना देवी मन्दिर में फिर कोटा के पास गेपरनाथ मन्दिर में और जोधपुर के चामुंडा
देवी मन्दिर में ये तो कुछ ऐसे बड़े हादसे है जिनको मीडिया ने काफी ज्यादा तवज्जो दिया! लेकिन इससे पहले भी समय समय पर देश के विभिन्न मंदिरों और धार्मिक अवसरों पर is तरह के हादसे होते रहे हैं और अभी भी
हो रहे हैं
पिछले कुछ महीनो से जिस तरह मंदिरों में हादसे हो रहे है उसे देख कर और सुन कर दिल काँप उठता है!
पहले हिमाचल प्रदेश के नैना देवी मन्दिर में फिर कोटा के पास गेपरनाथ मन्दिर में और जोधपुर के चामुंडा
देवी मन्दिर में ये तो कुछ ऐसे बड़े हादसे है जिनको मीडिया ने काफी ज्यादा तवज्जो दिया! लेकिन इससे पहले भी समय समय पर देश के विभिन्न मंदिरों और धार्मिक अवसरों पर is तरह के हादसे होते रहे हैं और अभी भी
हो रहे हैं
रविवार, 28 सितंबर 2008
आजमगढ़- का से कहूं मै जिया की बतियाँ
आजमगढ़ एक बदनाम सा शहर जो इस वक्त अपने दामन पर आतंकवाद का दंस झेल रहा है अचानक एक दिन मेरे सपनो में आ गया और मुझसे कहने लगा की मेरे बारे में कुछ लिखो मैंने कहा महोदय आपका चरित्र और
ऐतिहासिक सम्पदा इतनी संपन्न और वृहद् है की आप के बारे में लिखना मुझ जैसे छोटे और निरीह लेखक केबस की बात नही, उसने फिर मुझसे कहा की कोई बात नही जब कोई नही लिख रहा है तो तू ही लिख मै तेरी आधी अधूरी लेखनी को बर्दास्त कर लूँगा! जब इतना कुछ हो गया तो मैंने कहा की चलो ठीक है मै कोशिश करता हूँ ! इसके बाद मैंने लिखना शुरू किया!
आजमगढ़ पूर्वी उत्तर प्रदेश का एक जिला है जो महान धार्मिक नगर बनारस से ८० किलोमीटर दूर स्थित है
आजमगढ़ का एक उत्तम
ऐतिहासिक सम्पदा इतनी संपन्न और वृहद् है की आप के बारे में लिखना मुझ जैसे छोटे और निरीह लेखक केबस की बात नही, उसने फिर मुझसे कहा की कोई बात नही जब कोई नही लिख रहा है तो तू ही लिख मै तेरी आधी अधूरी लेखनी को बर्दास्त कर लूँगा! जब इतना कुछ हो गया तो मैंने कहा की चलो ठीक है मै कोशिश करता हूँ ! इसके बाद मैंने लिखना शुरू किया!
आजमगढ़ पूर्वी उत्तर प्रदेश का एक जिला है जो महान धार्मिक नगर बनारस से ८० किलोमीटर दूर स्थित है
आजमगढ़ का एक उत्तम
तुम दिल्ली मत जइयो
अभी कल ही की तो बात है महरौली में धमाका हो गया मई दफ्तर में बैठा धमाके से जुड़ी जानकारी ले रहा था
तभी ख़बर आई की अभिषेक बच्चन ने अपने दिल्ली आने का प्रोग्राम कैंसल कर दिया है! दरसल अभिषेक को यहाँ अपनी फ़िल्म के प्रमोशन के लिए आना था लेकिन धमाकों की बात सुनते ही शहेंशाह के बेटे ने आननफानन में अपना दिल्ली दौरा रद्द कर दिया ..और कहने लगे की तुम दिल्ली मत जइयो! देखिये अब इसमे बेचारे अभिषेक का भी क्या दोष इससे पिछली बार भी जब दिल्ली में धमाका हुआ था तब भी वो दिल्ली में ही थे उनके पिता जी के अनुसार वो धमाकों से बाल बाल बच गए अब इतना सब होने के बाद जाहिर तौर पर कोई भी डर जाएगा! अभिषेक जी को छोडिये बेचारी आस्ट्रेलियन क्रिकेट टीम की भी तो वही हाल है बेचारे काफी डरे सहमे है ! हा अगर कोई डरा नही है तो वो है हमारे नेता और हमारे यूपी , बिहार के भइया लोग , नेताओं को डर इसलिए नही है क्यों की सब उन्ही के भाई बंधू है है और भइया लोगों को डर इसलिए नही क्यों की उनके जान की कीमत न तो उनके नज़र में है और न ही सरकार के नज़र में
तभी ख़बर आई की अभिषेक बच्चन ने अपने दिल्ली आने का प्रोग्राम कैंसल कर दिया है! दरसल अभिषेक को यहाँ अपनी फ़िल्म के प्रमोशन के लिए आना था लेकिन धमाकों की बात सुनते ही शहेंशाह के बेटे ने आननफानन में अपना दिल्ली दौरा रद्द कर दिया ..और कहने लगे की तुम दिल्ली मत जइयो! देखिये अब इसमे बेचारे अभिषेक का भी क्या दोष इससे पिछली बार भी जब दिल्ली में धमाका हुआ था तब भी वो दिल्ली में ही थे उनके पिता जी के अनुसार वो धमाकों से बाल बाल बच गए अब इतना सब होने के बाद जाहिर तौर पर कोई भी डर जाएगा! अभिषेक जी को छोडिये बेचारी आस्ट्रेलियन क्रिकेट टीम की भी तो वही हाल है बेचारे काफी डरे सहमे है ! हा अगर कोई डरा नही है तो वो है हमारे नेता और हमारे यूपी , बिहार के भइया लोग , नेताओं को डर इसलिए नही है क्यों की सब उन्ही के भाई बंधू है है और भइया लोगों को डर इसलिए नही क्यों की उनके जान की कीमत न तो उनके नज़र में है और न ही सरकार के नज़र में
गुरुवार, 18 सितंबर 2008
आतंकियों के धमाके और बेचारी सरकार
पिछले दिनों दिल्ली में हुए सीरिअल ब्लास्ट ने एक बार फिर आतंकवाद को राष्ट्रीय चर्चा का विषय बना दिया है !
फिर वही ढेर सारे मुर्दा प्रश्न एक बार फिर अपने कब्र से बहार निकलकर लोगो की चर्चा के विषय बन गए हैं, जो कभी जयपुर, अहमदाबाद, बंगलोर , धमाकों के बाद अपनी कब्र में आराम कर रहे थे , अब तो ये प्रश्न भी लोगों की चर्चा का विषय बन कर उब चुके हें, लेकिन इन प्रश्नों का जवाब देने वाले हमारे सम्मानित नेता अपने रटे रटाए जवाबों से अभी तक नही ऊबे ! हर धमाकों के बाद एक ही प्रश्न और वही रटे रटाए जवाब आख़िर कब तक चलेगा ये , हमारे देश की सुरक्षा और खुफिया एजेंसियां आख़िर कब चेतेंगी हमारे जन प्रतिनिधि जिनके ऊपर हमारी सुरक्षा की जिम्मेदारी है आख़िर कब जागेंगे और हमारे दर्द को कब महसूस करेंगे ! मुझे दुष्यंत कुमार की एक पंक्ति इस पर बड़ी सटीक लगती है ... धुप ये अटखेलियाँ हर रोज करती है , एक साया सीढियाँ चढ़ती उतरती हें
कौन शासन से कहेगा कौन समझेगा , एक चिडिया इन धमाकों से सिहरती है
फिर वही ढेर सारे मुर्दा प्रश्न एक बार फिर अपने कब्र से बहार निकलकर लोगो की चर्चा के विषय बन गए हैं, जो कभी जयपुर, अहमदाबाद, बंगलोर , धमाकों के बाद अपनी कब्र में आराम कर रहे थे , अब तो ये प्रश्न भी लोगों की चर्चा का विषय बन कर उब चुके हें, लेकिन इन प्रश्नों का जवाब देने वाले हमारे सम्मानित नेता अपने रटे रटाए जवाबों से अभी तक नही ऊबे ! हर धमाकों के बाद एक ही प्रश्न और वही रटे रटाए जवाब आख़िर कब तक चलेगा ये , हमारे देश की सुरक्षा और खुफिया एजेंसियां आख़िर कब चेतेंगी हमारे जन प्रतिनिधि जिनके ऊपर हमारी सुरक्षा की जिम्मेदारी है आख़िर कब जागेंगे और हमारे दर्द को कब महसूस करेंगे ! मुझे दुष्यंत कुमार की एक पंक्ति इस पर बड़ी सटीक लगती है ... धुप ये अटखेलियाँ हर रोज करती है , एक साया सीढियाँ चढ़ती उतरती हें
कौन शासन से कहेगा कौन समझेगा , एक चिडिया इन धमाकों से सिहरती है
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